Tuesday, May 4, 2010

कल मै पटना आया , जोश के अतिरेक में मैं मोटरसाइकिल से दरभंगा से चल पडा। संजीव मामा को हलकी चोट आई थी। अब वे लगभग ठीक हैं। गायत्री मामी के साथ सुडोकू बनाना सीखना भी अलग प्रकार का अनुभव है। उनमे सुडोकू बनाने की अद्भुत छमता है, धैर्य है।

No comments:

Post a Comment