Saturday, April 10, 2010

आज रविवार है और मै अपने पटना प्रवास के दौरान सोच रहा हूँ कि कैसे होते होंगे वे लोग जिन्हें अपने पुत्र के बारे में कुछ नहीं पता होता है! शायद उनका ही लड़का है जो पान की दूकान पर खड़ा है और जिसने अभी अभी सर झुकाए पढने जाती एक अकेली लड़की को छेड़ा है, डराया है!

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